बिना ‘तेल और बाती’ के इस मंदिर में जलती है मां की ज्योत, जाने क्या है मंदिर का रहस्य

पुराणों के अनुसार, देवी सती के 51 शक्तिपीठ है। इन सभी जगह पर मां सती के शरीर का एक-एक अंग गिरा है। और उस स्थान को आज मां के शक्तिपीठ के रूप में पूजा जाता है। लेकिन क्या आप जानता है मां की जिह्वा कहां गिरी थी? वहां पर संदियों से मां की ज्योत, बिना तेल और बाती की जलती है। हैरानी की बात है।

लेकिन कहते है कि भगवान के घर कई चमत्कार होते है। और ये भी मां का एक छोटा सा चमत्कार है। जिसके जरीए मां अपनी मौजूदगी का अहसास करवाती है। दरअसल हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा में ज्वाला देवी का एक मंदिर है। माना जाता है कि इस जगह पर ही मां सती की जिह्वा गिरी थी। जिसके चलते ये मंदिर 51 शक्तिपीठ में से एक शक्तिपीठ है। इस मंदिर में मां की ज्योत बिना तेल और बाती के सदियों से जल रही है। जिसके चलते इस मंदिर को चमत्कारी मंदिर भी कहा जाता है।

ज्वाला देवी के मंदिर में कुल नौ ज्वालाएं जलती है। जिसमें से एक प्रमुख ज्वाला है। वो चांदी के दीय में जलती है। हालांकि यहां पर सभी ज्वालाओं के अपने नाम है। प्रमुख ज्वाला को महाकाली कहा जाता है। तो वही बाकि आठ ज्वालाओं के नाम, अन्नपूर्णा, चंडी, हिंगलाज, विंध्यवायिनी, महालक्ष्मी, सरस्वती, अम्बिका और अंजी देवी है। हालांकि, इस मंदिर में नवरात्र के दिनों में भक्तों की काफी भीड़ होत है। कई राज्यों से लोग इस मंदिर में मां के दर्शन करने आते है। माना जाता है कि इस मंदिर में नवरात्र के दिनों में रोजाना 50 हजार से ज्यादा भक्त दर्शन करते है।

मां की होती है विशेष आरती: ज्वाला देवी मंदिर की आरती काफी मशहूर है। इस मंदिर में मां की पांच बार आरती होती है। मां की पहली आरती सुबह पांच बजे होती है। मां की पहली आरती सुबह पांच बजे होती है। इसके बाद मां की दूसरी आरती सुबह सात बजे होती है। फिर तीसरी आरती होती है जो दोपहर में होती है। चौथी आरती मां की शाम को होती है। वही रात को 9 बजे मां की पांचवी आरती होती है। जिसके बाद ही मां के मंदिर के कपाट बंद किए जाते है।

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