Shree Ram : श्री राम के जीवन से जुड़े रहस्य | आखिर क्यों सबके प्रिय हैं पुरूषोत्तम श्री राम …

Shree Ram : श्री राम के जीवन से जुड़े रहस्य | आखिर क्यों सबके प्रिय हैं  पुरूषोत्तम श्री राम …

Shree Ram : श्री राम राम शब्द कहने में जितना सुंदर है उससे  Shree Ram कहीं महत्वपूर्ण है इसका उच्चारण. राम कहने मात्रा से ही शरीर और मैन में अलग तरह की प्रतिक्रिया होती है और आत्मिक शांति मिलता है. भगवान श्री राम ने एक आदर्श चरित्र प्रस्तुत कर समाज को की आत्मा है. आदर्श आज भी भारत के जनमानस के मैन मैन में बसते हैं लिए इस वीडियो में जानते हैं भगवान श्री राम से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण तथ्व.

भगवानसिक महापुरुष द और इसके अनेक प्रमाण मिलते हैं. अनेक शधों के बाद यह अनुमान लगाया गया है की  Shree Ram भगवान श्रीराम का जन्म पाँच हज़ार एक सौ चौदह ई. पूर्व अयोध्या में हुआ था और इसी वजह से हम चैत्र मास की नवमी को रामनवमी के रूप में मानते हैं. यह बात अयोध्या के इतिहास और अयोध्या की बंशावली से भी सिद्ध होता है.

 Shree Ram
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प्रभु श्री राम

प्रभु श्री राम पर वैसे तो कई ग्रंथ लिखे गए हैं लेकिन वाल्मीकि कृत रामायण ही प्रामाणिक  Shree Ram ग्रंथ बनाया जाता है. रामायण मूल रूप से संस्कृत में लिखा गया ग्रंथ है तमिल भाषा में कंबन रामायण, असम में कश्मी रामायण, उड़िया में विलंका रामायण, कन्नड़ में पम रामायण, कश्मीर में  Shree Ram कश्मीरी रामायण, बंगाली में रामायण, पंचाली, मराठी में भवा रामायण आदि. भारतीय भासाओं में प्राचीन कल में ही अनेक रामायण लिखी गई हैं.

मुगल कल में गोस्वामी तुलसीदास जी ने  Shree Ram अवधिी भाषा में रामचित्रमानस लिखी जो की हिंदी भारती और उससे जुड़े क्षेत्र में प्रचित है.

विदेशी में कंपचिया की रामकृति, लाओस में  Shree Ram प्रलकलाम राम जातक, मलेशिया में हियाकत श्रीराम, थाईलैंड में रामकन और नेपाल में भानु भक्त विितमायण बहुत ही प्रचलित माने जाते हैं. इनके अलावा भी कई अन्य देशों में वहां की स्थानीय भाषा में रामायण लिखी गई है.

भगवान बुद्ध

क्या आप यह जानते हैं की भगवान बुद्ध भगवान श्री राम के  Shree Ram वंशज द. मनु के दस पु. उनमें से एक दक कुल में रघु हुए. रघु कुल में भगवान श्री राम हुए. श्री राम के पुत्र कुश और कुश की प्रजाशी पीढ़ी में शल्य हुए. शल्य महाभारत कल में कौरव की ओर से लड़े. इन्हीं शल्य की परिस पीढ़ी में सिद्धार्थ हुए जो साख्य पुत्र सुदोधन के बेटे थे.

सिद्धार्थी आगे चलकर गौतम बुद्ध के नाम से विख्यात हुए. इनका  Shree Ram जन्म नेपाल की लुम्बिनी में हुआ था. सिद्धार्थ बादसेल सूरत और सुमित हुए. जयपुर घराने की महारानी पद्मनी और उनके परिवार के लोग श्रीराम के पुत्र कुश के वंशज थे, जिन्हें श्री राम का तीन सौ नौवां पीढ़ी माना जाता है.

 Shree Ram
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राम का जन्म

भगवान श्री राम का जन्म तो बहुत बड़े राजघराने में हुआ था.  Shree Ram श्री राम राजा दशर के पुत्र द. श्री राम का बचपन राजधारानी में बिता परंतु बनवासी और आदिवासियों के लिए भी भगवान श्री राम बहुत ही प्रिया और कुछ नियत द. जब भगवान श्री राम को चौदह वर्ष का वनवास हुआ उसमें से उन्होंने बारह वर्ष जंगल में रहकर केट. बारह वें वर्ष के दौरान रावण ने माता सीता का हरण कर लिया.

तत्पश्चात भगवान श्री राम ने अपने दो वर्ष माता सीता को ढूंढने करने और  Shree Ram रावण से युद्ध लड़ने में बिताया. इन चौदह वर्ष के दौरान भगवान श्री राम ने अपना समय वनवासियों एवं आदिवासियों केृत किया जिसकी वजह से वो उनके भी प्रिया बने रहे.

तपस्वी का जीवन

प्रभु श्री राम ने वैन में एक तपस्वी का जीवन वरृत किया वे जहां भी जाते द.  Shree Ram तीन लोगों के रहने के लिए झड़ी तैयार करते द. और भूमि पर सूर द वे रोज कंद मूल खाकर अपनी भूख मिटाते और प्रतिदिन साधना करते उनके तन पर खुद के बनाए हुए वस्त्र होते द. धनुष और बाद से राक्षसों और हिंसक पशुओं का वध कर वे जंगल के लोगों की रक्षा करते द.

Shree Ram

भगवान श्री राम ने ही सर्वप्रथम भारत के सभी जातियों को और  Shree Ram संप्रदायों को एक सत्र में बंधने कार्य किया एक भारत का निर्माण कर उन्होंने सभी भारतीयों को एक साथ मिलाकर एक अखंड भारत की स्थापना की थी भारतीय राज्य तमिलनाडु, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, मध्य प्रदेश, केरल, कर्नाटक सहित नेपाल, लाओस किया मलेशिया, कंबोडिया, इंडोनेशिया, बांग्लादेश, भूटान, श्रीलंका, बाली, जावा, सुमात्रा और थाईलैंड जैसे  Shree Ram देशों के संस्कृति एवं ग्रंथों में भगवान श्री राम इसीलिए आज भी जिंदा है.

एत्रि मुनि को रक्षसन से मुक्ति लाने के बाद भगवान  Shree Ram श्री राम दंडकारण क्षेत्र में चले गए जहां प आदिवासियों की भूलता थी. यहां के आदिवासियों को बसर के से बचाने के बाद भगवान श्री राम दस वर्षों तक उन्हें के बीच में रहे. उन्होंने बनवासी और आदिवासियों के अलावा निषाद, वानर, मातंग और रि समाज को भी धर्म की शिक्षा दी.

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