Ramayana History : रामायण के 20 जिंदा सबूत से वैज्ञानिक हैरान |

Ramayana History : रामायण के 20 जिंदा सबूत से वैज्ञानिक हैरान |

Ramayana History: राम और रामायण अनाधि कल से लोगों की आस्था के केंद्र रहे हैं. रामायण के अनुसार भगवान राम ने  Ramayana History अधर्मी रावण का वध कर धर्म की स्थापना की थी. बहुत से लोग सवाल यह भी करते हैं कि क्या भगवान राम वास्तव में पृथ्वी पर पैदा हुए थे? क्या वाकई रावण के दशशिर और बीस भुजाएं थीं? क्या हनुमान जी अपनी इच्छा अनुसार अपना रूप बदल सकते थे जो राम के अस्तित्व पर ही सवाल उठाते हैं?

आज उनको भी यह वीडियो देखना चाहिए. आज हम आपको एक नहीं दो नहीं बल्कि भगवान राम और  Ramayana History रामायण से जुड़े बीस प्रमाण देने वाले हैं जो आज भी जीवित अवस्था में है और आज भी मौजूद है. नमस्कार मेरा नाम है धीरेन्द्र और आप देख रहे हैं.

Ramayana History
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हिंदू बीस प्रमाणों

हिंदू बीस प्रमाणों में सबसे पहले बात करते हैं पहले प्रमाण की और वह है सांप के सिर की जैसी गुफा.  Ramayana History रावण जब माता सीता का हरण कर श्रीलंका पहुंचा तो सबसे पहले उसने माता सीता को इसी स्थान पर रखा था. इस गुफा का सिर कोबरा सांप की तरह फैला हुआ है।. गुफा के चारों ओर की नक्काशी इस बात का प्रमाण है. दूसरे प्रमाण की बात करते हैं और वह है हनुमान.

गढ़ी स्थान पर हनुमान जी भगवान राम की प्रतीक्षा करते थे. उसे हनुमान  Ramayana History गढ़ी कहते हैं. रामायण में भी इसका उल्लेख है कि अयोध्या के पास इस स्थान पर एक हनुमान मंदिर है.

जो हनुमान गढ़ी के नाम से प्रसिद्ध है. अब आते हैं तीसरे प्रमाण पर और वह है हनुमान जी के  Ramayana History पदचन्ह रामायण में. यह भी वर्णन है कि जब हनुमान जी ने सीता को खोजना के लिए समुद्र पार किया तो उन्होंने एक विशाल रूप धरण किया. आज भी श्रीलंका में उसे स्थान पर भगवान हनुमान के प्रमाण की बात करते हैं और वह.

Ramayana History
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रामसेतु

रामसेतु रामसेतु भी रामायण और भगवान श्री राम के  Ramayana History अस्तित्व का प्रमाण है.

रामायण में समुद्र से श्रीलंका तक इस पुल के बारे में लिखा है. मित्रों  Ramayana History यह पुल पानी पर तैरते पत्थरों से बना था जिसे आज भी समुद्र तल पर देखा जा सकता है. पांचवे जीवित प्रमाण की बात करते हैं और वह है तैरते हुए पत्थर. समुद्र पर पुल बनाने के लिए पत्थरों की आवश्यकता थी जो पानी पर टर सके.

जहां उन्हें संजीवनी दी गई थी श्रीलंका में हिमालय की  Ramayana History जड़ी बूटियों का पाया जाना. भगवान राम के अस्तित्व का प्रमाण आठवें नंबर पर आते हैं वह है अशोक वाटिका।. सीता हरण के बाद जब रावण उन्हें लंका ले गया तो माता सीता ने उनके महल में रहने से मना कर दिया।. तब रावण ने उन्हें अशोक वाटिका में रखा जहां एक पेड़ के नीचे बैठी थी.

सातवें प्रमाण की बात करते हैं

सातवें प्रमाण की बात करते हैं और वह  Ramayana History श्रीलंका में पाई जाने वाली हिमालय जड़ी बूटी श्रीलंका में उस स्थान पर दुर्लभ हिमालय जड़ी बूटी के अर्ग पाए गए हैं जहा पर लक्ष्मण बेहोश हो गए थे.

शोध करने के पश्चात पता चला कि यह पत्थर उसी समय के हैं जब रामायण हुई थी. छठे number पर आते है और वह है droणाagir पर्वत. लक्ष्मण मेघनाथ युद्ध के दौरान जब लक्ष्मण मेघनाथ से बेहोश थे तो हनुमान जी संजीवनी को लेने दणाग पर्वत पर गए थे. संजीवनी की पहचान न होने के कारण उन्होंने पूरे पहाड़ को उठा लिया था और यह पहाड़  Ramayana History आज भी मौजूद है.

Ramayana History

शोध करने के पश्चात पता चला कि यह पत्थर उसी समय के हैं जब रामायण हुई थी. छठे number पर आते है और वह है droणाagir पर्वत. लक्ष्मण मेघनाथ युद्ध के दौरान जब लक्ष्मण मेघनाथ से बेहोश थे तो हनुमान जी संजीवनी को लेने दणाग पर्वत पर गए थे. संजीवनी की पहचान न होने के Ramayana History कारण उन्होंने पूरे पहाड़ को उठा लिया था और यह पहाड़ आज भी मौजूद है.

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