क्या स्खलन से पूर्व निकलने वाले तरल से भी महिलाएं प्रेग्नेंट हो सकती है, जानिए एक्सपर्ट का जवाब

उत्तेजना के दौरान और स्खलन से पहले उत्तेजित लिंग में गीलापन रहता है और तरल पदार्थ निकलता है उसे ही प्रीक्लुलेशन तरल या प्री-कम कहा जाता है। इसे पूर्व-स्खलन भी कहा जाता है क्योंकि यह स्खलन से पहले होता है-यह एक अलग तरह का गीलापन होता है जो चरम उत्तेजना के दौरान होता है।

स्खलन से पूर्व निकलने वाला यह द्रव्य (प्री-कम) सफेद एवं क्षारीय तरल पदार्थ है जो एंजाइम और म्यूकस से बना होता है। यह उत्तेजना के दौरान पुरुष के प्राइवेट अंग से निकलता रहता है।

यह मूत्रमार्ग के उसी रास्ते से निकलता है जिस रास्ते से स्खलन के दौरान सफेद रंग का चिपचिपा पदार्थ निकलता है। लेकिन क्या इस तरल महिला गर्भवती हो सकती हैं?

अगर हम देखे तो वास्तव में महिला गर्भवती शुक्राणु से होती है। किसी तरल से नही क्योंकि सफेद रंग का यह चिपचिपा पादर्थ भी एक तरह का गाढ़ा तरल ही होता है जिसमे ढेर सारे शुक्राणु होते हैं यादि इस पदार्थ में शुक्राणु न हो तो इस पदार्थ से भी महिला गर्भवती नही हो सकती है, तो क्या स्खलन से पूर्व निकलने वाले तरल यानि प्री-कम में शुक्राणु होते है?

तो देखिए शुक्राणु अंडकोष में बनाता है जो कि पुरुषों के गुप्तांग के नीचे चमड़े की थैली में लटक या झूल रहे होते है इसके विपरीत प्री-कम पेट के भीतर पेशाब के थैली की नीचे मौजुद बुलबोरथ्रल ग्रंथियों से आता हैं तो पूरी तरह से कह सकते है कि स्खलन से पूर्व निकलने वाले तरल से शुक्राणु नही होते है।

लेकिन कुछ मामलों में महिला स्खलन से पूर्व निकलने वाले तरल से भी महिला गर्भवती हों सकती हैं यादि पिछले स्खलन से बचे हुए कुछ शुक्राणु मूत्रमार्ग में रह जाते हैं। जब प्री-कम तरल पदार्थ मूत्रमार्ग से होते हुए पुरुष के खास अंग से बाहर निकलता है तो यह उस बचे हुए शुक्राणु को रास्ते से उठा सकता है और उसे प्राइवेट अंग से बाहर निकालता है।

अगर संबंध बनाने के दौरान सेफ्टी का उपयोग ना किया जाए तो इस तरल (प्री-कम) के साथ शुक्राणु भी बहकर महिलाओं के गुप्तांग के अंदर चले जाते हैं जिससे महिला गर्भवती हो सकती है।

इसके अलावा कुछ अन्य तरीके से भी प्री-कम के कारण गर्भधारण की थोड़ी संभावना होती है। उत्तेजित पुरुष के प्राइवेट अंग को महिलाओं के गुप्तांग के द्वार पर लगाने से भी गर्भवती होने की संभावना होती है। लेकिन इस तरीके से गर्भवती होने की संभावना इसलिए कम होती है क्योंकि शुक्राणु शरीर के बाहर अधिक देर तक जिंदा नहीं रहते हैं। लेकिन फिर भी थोड़ी संभावना होती है।

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