मर्दानगी बढ़ाने के लिए इस देसी चीज का इस्तेमाल करते थे आसाराम, 75 साल की उम्र में उन्हें मिलती है 20 जैसी ताकत

मर्दानगी बढ़ाने के लिए इस देसी चीज का इस्तेमाल करते थे आसाराम, 75 साल की उम्र में उन्हें  मिलती है 20 जैसी ताकत

खुद को जवां बनाने के लिए लोग तरह-तरह के प्रयास करते हैं। बहुत से लोग अपने बैठने के तरीके से बहुत कुछ बदलते हैं। कुछ अपने खाने की आदतों में बदलाव करते हैं। परिवार की सुख-शांति के लिए पति-पत्नी के बीच के शारीरिक संबंध भी मधुर होने चाहिए।

आज हम आपको एक ऐसी चीज के बारे में बताने जा रहे हैं जो मर्दानगी बढ़ाने के लिए आसाराम भी लेते थे। जानकारों का कहना है कि इस चीज को खाने से 75 साल की उम्र में 20 साल की ताकत मिलती है।

आजकल सफेद मूसली की मांग लगातार बढ़ती जा रही है। लोगों को आसाराम के बारे में पता चलने के बाद से उनका चलन तेज हो गया है। यह एक देशी जड़ी बूटी है जिसका उपयोग आसाराम अपने आश्रम में मर्दानगी बढ़ाने के लिए करते हैं।

आसाराम सफेद मूसली लेता है, उसकी नौकरानी ने जोधपुर उच्च न्यायालय में मुकदमे के दौरान खुलासा किया। गौरतलब है कि सफेद मूसली की खेती काफी महंगी होती है। लेकिन इसमें खर्च भी ज्यादा होता है। दवा कंपनी इसका इस्तेमाल कई दवाओं में करती है।

मर्दानगी को बढ़ावा देने वाली ज्यादातर दवाओं में सफेद मूसली का इस्तेमाल किया जाता है। मूसली भी दो प्रकार की होती है। सफेद मूसली का उपयोग बांझपन और कम शुक्राणुओं की संख्या को खत्म करने के लिए किया जाता है।

यह न केवल पुरुषों के लिए बल्कि महिलाओं के लिए भी समान रूप से लाभकारी दवा है। सफेद मूसली का उपयोग स्वदेश में शीघ्रपतन के उपचार में किया जाता है। कौंच के बीज, सफेद मूसली और अश्वगंधा को बराबर मात्रा में मिलाकर चूर्ण बनाकर सुबह-शाम एक चम्मच दूध के साथ लेने से शीघ्रपतन ठीक हो जाता है।

ऐसे बनता है पाउडर सफेद मूसली शीघ्र स्खलन के घरेलू उपचार के लिए बहुत प्रसिद्ध है। दालचीनी के बीज, सफेद मूसली और अश्वगंधा के बीज को समान मात्रा में चीनी के साथ मिलाकर बारीक पाउडर बना लें। सफेद मूसली का उपयोग वर्षों से विभिन्न औषधियों के निर्माण में भी किया जाता रहा है।

मूल रूप से यह एक ऐसी जड़ी-बूटी है जो किसी भी प्रकार की शारीरिक परेशानी को दूर करने की क्षमता रखती है। यही कारण है कि कोई भी आयुर्वेदिक सार जैसे चेवनप्राश आदि इसके बिना पूर्ण नहीं माना जाता है।

आपकी जानकारी के लिए बता दे कि मूसली दो तरह की होती है. सफेद मूसली का उपयोग बांझपन और शुक्राणु की कमी के इलाज के लिए किया जाता था। यह अभी भी आयुर्वेदिक चिकित्सा में प्रयोग किया जाता है यह न केवल पुरुषों के लिए बल्कि महिलाओं के लिए भी समान रूप से शक्तिशाली औषधि है।

आपको बता दें कि यह बहुत ही पौष्टिक होता है और इसमें शिलाजीत भी मिलाया जाता है। आपको बता दें कि विदेशों में इस पौधे से सन बनाया जाता है।पुरुष शरीर की ताकत बढ़ाने के अलावा वीर्य में शुक्राणुओं की संख्या बढ़ाने में भी मदद करता है। बहुत शोध के बाद भी यह पाया गया है कि मधुमेह के बाद भी नपुंसकता सफेद मलमल से दूर है।

आसाराम दुलार्भ जड़ी-बूटियों का सेवन करते थे और अपनी मर्दानगी बढ़ाने के लिए स्वर्णभस्म पीते थे। स्वर्ण भस्म का अर्थ है सोने का चूर्ण। आयुर्वेद में स्वर्ण राख का उपयोग हजारों वर्षों से औषधि के रूप में किया जाता रहा है। यह शरीर को शक्ति प्रदान करने के साथ-साथ मानसिक शक्ति में भी सुधार करता है। आयुर्वेद में सोने जैसी कीमती धातु को रासायनिक रूप से राख से तैयार किया जाता है। जो सोने की तरह कीमती है।

ऐसा माना जाता है कि ज्वलन शक्ति बढ़ाने के लिए सोना टॉनिक के रूप में दिया जाता है। जिसके सेवन से यौन शक्ति बढ़ती है। वृद्धावस्था में सोने की राख के प्रयोग से शरीर के सभी अंगों को शक्ति मिलती है। आसाराम के पूर्व बैद्य अमृत प्रजापति ने अपनी मृत्यु से पहले खुलासा किया था कि बलात्कारी आसाराम ने अपनी यौन शक्ति बढ़ाने के लिए दूध में सोने की राख मिलाकर पिया था।

आसाराम ने कौन से दुर्लभ पौधे का इस्तेमाल किया आसाराम अपनी मर्दानगी बढ़ाने के लिए दुर्लभ जड़ी-बूटियों का सेवन करते थे। आसाराम जड़ी-बूटियों का अनोखा मिश्रण बना रहे थे। जिसमें कामिनी मर्दन, अश्वगंधा, शिलाजीत और मकरध्वज को लिया गया। मकर ध्वज की जड़ी-बूटियाँ दुर्लभ जड़ी-बूटियों और रस भस्म से बनाई जाती हैं। अश्वगंधा के सेवन से व्यक्ति लंबे समय तक जवान रहता है।

आसाराम ने अपनी यौन शक्ति बढ़ाने के लिए शिलाजीत भी खाया था।आसाराम के राजा अमृत प्रजापति के अनुसार, आसाराम उच्च गुणवत्ता वाले शिलाजीत का सेवन करते थे। इसके पीछे उनका उद्देश्य पूरी तरह से और विशेष रूप से अपनी मर्दानगी को बढ़ाना था। आपको बता दें कि शिलाजीत एक खास तरह की औषधि है जो कोलतार की तरह काली और मोटी होती है। माना जाता है कि इसके सेवन से यौन शक्ति बढ़ती है।

वैदिक दृष्टिकोण से यह माना जाता है कि शिलाजीत पत्थरों से बना है। सूर्य की गर्मी पहाड़ों की धातु को पिघला देती है जिससे चट्टानें बनती हैं। शिलाजीत कड़वा होता है। शिलाजीत चार प्रकार की होती है। सोना, चांदी, तांबा और लोहा है। यानी वह जवान रहने के लिए तरह-तरह के हथकंडे अपनाता था.

admin

Leave a Reply

Your email address will not be published.

error: Content is protected !!